अपान वायु मुद्रा के लाभ

👉🏻प्रातः स्नान आदि के बाद आसन बिछाकर हो सके तो पद्मासन में अथवा सुखासन में अथवा वज्रासन में बैठें…
पाँच-दस गहरे साँस लें और धीरे-धीरे छोड़ें..
उसके बाद शांतचित्त होकर..
जैसा कि ऊपर तस्वीर में दिखाया गया है…
उस मुद्रा को दोनों हाथों से करें…

नोट:- विशेष परिस्थिति में इन्हें कभी भी कर सकते हैं…

अपान वायु मुद्रा के लाभ हार्ट अटैक की स्थिति महसूस हो तो इस मुद्रा के केवल 10 मिनट के करने मात्र से अटैक से बचा जा सकता है…

 

इस मुद्रा को अपान वायु मुद्रा कहते हैं…
अँगूठे के पास वाली पहली उँगली को अँगूठे के मूल में लगाकर अँगूठे के अग्रभाग की बीच की दोनों उँगलियों के अग्रभाग के साथ मिलाकर सबसे छोटी उँगली (कनिष्ठिका) को अलग से सीधी रखना है…

 

किसी को हृदयघात आये या हृदय में अचानक अगर पीड़ा होने लगे तब तुरन्त ही यह मुद्रा करने से..
हृदयघात को रोका जा सकता है…

 

अपानवायु मुद्रा… हृदय रोगों जैसे कि हृदय की घबराहट, हृदय की तीव्र या मंद गति, अपान वायु मुद्रा के लाभ हृदय का धीरे-धीरे बैठ जाना आदि में थोड़े समय में ही लाभ देती है…
पेट की गैस, मेद की वृद्धि एवं हृदय तथा पूरे शरीर की बेचैनी इस मुद्रा के अभ्यास से दूर होती है…

 

 

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