वीरासन : हठ योग के फ़ायदे

”वीरासन” संस्कृत भाषा का शब्द है। जो दो शब्दों से मिलकर बनता है। पहला शब्द है ‘वीर’ जो योद्धाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जबकि दूसरा शब्द है ‘आसन’ जिसका अर्थ होता है ‘बैठना’। यानी कि अगर दोनों शब्दों को मिलाकर देखा जाए तो इसका अर्थ होता है वीरों या योद्धाओं के बैठने का आसन।

ज्यादातर योद्धा युद्ध के बाद विश्राम के लिए इसी आसन में बैठते थे, क्योंकि ये आसन उन्हें चौकन्ना और एक्टिव बनाए रखने में मदद करता था। लेकिन योगियों के लिए युद्ध का क्या अर्थ है? योगियों ने क्यों इस आसन का निर्माण किया?

योगी के लिए सबसे कठिन अपने मन के भीतर चल रही उथल-पुथल को नियंत्रित करना ही होता है। वीरासन आपको अधिकार सहित मन को नियंत्रित करना सिखाता है और सतर्क बनाए रखने में मदद करता है। वीरासन बेहद आसान आसन है और हठयोग की प्रमुख मुद्रा है।

वीरासन करने की विधि

  1. सर्व प्रथम किसी स्वच्छ, शांत, समतल और सुरक्षित जगह पर उचित आसन लगाकर सुखासन में बैठ जाएं।
  2. तत्पश्चात बाए घुटने को मोड़ते हुए अपनी बाई जंघा के नीचे एड़ी और तलवा ले जाए।
  3. सुनिश्चित करें कि आपके एड़ी व तलवा आपके कूल्हे के ठीक नीचे होंं।
  4. अब दाए पैर को भी घुटने के सहारे मोड़ते हुए उसे भी दाई जंघा और कूल्हे के नीचे लाए।
  5. अपने हाथों को आराम से घुटनों पर रखें।
  6. फिर अपने घुटनों को पास लाएं जिससे आपके पैरों के बीच का अंतर अपने आप बढ़ जाएगा। ये अंतर आपके कूल्हे की चौड़ाई से ज्यादा होना चाहिए।
  7. इसके बाद, मजबूती से अपने घुटनों को फर्श की तरफ दबाएं।
  8. फिर धीरे-धीरे अपने कूल्हों को नीचे की तरफ लाएं, जैसे आप चटाई पर बैठने जा रहे हों। अपने पिंडलियों को मोड़ते हुए दूर करें। ध्यान दें कि आपके कूल्हे एड़ियों के ठीक बीच में रहें।
  9. इस बात पर खास ध्यान दें कि वीरासन पर बैठने के दौरान अगर घुटनों में कोई समस्या आए तो इसका अभ्यास तुरंत ही बंद कर दें।
  10. अपने पैरों की अंगुलियों को बाहर की तरफ निकलने दें। जबकि आपके टखने ऐसी स्थिति में होने चाहिए, जैसे वो घुटनों को बचा रहे हों।
  11. शरीर को सीधा रखे तथा नाभि को भीतर की तरफ खींचें। जबकि अपनी रीढ़ की हड्डी को खींचते हुए सिर को पीछे की तरफ झुकाने की कोशिश करें।
  12. यह वीरासन का प्रथम सोपान है। आप चाहे तो एक घुटने को पुनः शरीर के पेरेरल रख सकते है।
  13. वीरासन का अभ्यास 30 सेकेंड तक करें। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। एक बार आप इस आसन के अभ्यास में दक्ष हो जाएं, इसके बाद आप इस आसन का अभ्यास मेडिटेशन के लिए भी कर सकते हैं।

वीरासन योग करने के फायदे

  1. हालांकि ये आसन देखने में काफी साधारण है, पर जब तक आप जमीन पर बैठने का अभ्यास नहीं करते हैं, वीरासन : हठ योग के फ़ायदे तब तक वीरासन करना आपके लिए वाकई कठिन होता है।
  2. इससे आपको टांगों पर भारी दबाव महसूस हो सकता है। वीरासन : हठ योग के फ़ायदे आपको टांगों की पिंडलियों और जांघों में भी खिंचाव महसूस हो सकता है। वीरासन : हठ योग के फ़ायदे आपको बहुत ही कम लोग ऐसे दिखेंगे जो वीरासन पर आसानी से बैठ पाते होंगे, जब तक उन्हें वीरासन में बैठने की आदत न रही हो।
  3. लेकिन इसके निरंतर अभ्यास से जांघें, घुटने, टखने और कूल्हे की मांसपेशियां काफी लचीली बनती है। वीरासन : हठ योग के फ़ायदे इसके लिए आपकी घुटनों को मोड़ने की जरुरत भी पड़ती है।
  4. इससे टांगों को अच्छा स्ट्रेच मिलता है, वीरासन : हठ योग के फ़ायदे किससे आपको रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कामों जैसे दौड़ना, वॉकिंग और साइकिलिंग में मदद मिलती है। ये आपके टांगों को भीतर से मजबूत बनाता है।
  5. आपके क्वाड्रीसेप्स की लंबाई बढ़ती है, वीरासन : हठ योग के फ़ायदे और सैक्रम/sacrum (कमर के पीछे की तिकोनी हड्डी) चौड़ी होती है। कई बार कुर्सी पर बैठने वाले लोगों को ये हड्डी सिकुड़ने की शिकायत आती है। ये आसन कब्ज़ और कमजोर पाचन की समस्या से निपटने में भी मदद मिलती है।
  6. ये आसन टखने, जांघो और घुटनों को अच्छी स्ट्रेचिंग भी देता है।
  7. इस आसन से पैरों के पंजे भी बहुत स्ट्रांग हो जाते हैं।
  8. वीरासन के अभ्यास से पाचन क्रिया और गैस की समस्या में राहत मिल सकती है।
  9. थकान के बाद वीरासन करने से पैरों में रक्त संचार बढ़ता है और आराम मिलता है।
  10. वीरासन आपका पॉस्चर सुधारने में भी मदद करता है।
  11. वीरासन हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और समतल पांव होने की समस्या में भी कारगर है।
  12. वीरासन को मेडिटेशन के लिए भी बेस्ट आसन माना जाता है। वीरासन : हठ योग के फ़ायदे इस आसन को करने के दौरान आप दुनिया से जुड़े रहते हुए भी दूर हो जाते हैं। आपका सोता हुआ अवचेतन मन जाग्रत हो जाता है। वीरासन : हठ योग के फ़ायदे ये आसन किसी मजबूत शरीर और स्थिर मन वाले योद्धा के लिए ही बनाया गया था।

वीरासन योग में सावधानिया

  1. नवयोगी शुरुआत में इसे विशेषज्ञ की सलाह व मार्गदर्शन के उचित देखरेख में करे।
  2. आमतौर पर ये आसन हर कोई कर सकता है पर पैरो, हड्डियों या जोड़ दर्द के रोगी, वीरासन : हठ योग के फ़ायदे दिल के मरीज या ब्रेन दर्द से पीड़ित इसे पूर्ण सावधानी और विशेषज्ञ को सलाह पर ही करे।
  3. पैरो पिंडलियों टखनों या हड्डियों में ज्यादा दर्द महसूस हो तो आसान नहीं करना चाहिए।
  4. इस आसन को सुबह तथा खाली पेट ही करना चाहिए

वीरासन करने से पहले ये आसन करें

  1. बद्ध कोणासन
  2. बालासन

वीरासन करने के बाद ये आसन करें

  1. पद्मासन
  2. वकासन

 

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